लखनऊ। बैंक खाते में नकद राशि जमा करना अभी भी आम प्रथा बनी हुई है। छोटे‑छोटे दैनिक लेनदेन के लिए ज्यादातर लोगों को कोई समस्या नहीं आती।
लेकिन जब जमा की जा रही रकम बड़ी हो या साल भर में बार‑बार बड़ी नकद राशियाँ खाते में डाली जाएं, तो मामला अलग हो जाता है। ऐसी स्थितियों में बैंक और आयकर विभाग की निगरानी बढ़ सकती है और खाता धारक से लेनदेन के स्रोत के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
कब रखें सावधानी
बड़े नकद जमा पर बैंक को अनियमितता का संदेह हो सकता है। अगर एक ही खाते में एक‑बारगी बड़ी रकम या नियमित अंतराल पर बड़ी रकम आती रहे तो बैंक ऑडिट, रिपोर्टिंग या संदिग्ध लेनदेन की सूचना कर सकता है। आयकर विभाग भी ऐसे लेनदेन की पड़ताल कर सकता है और टैक्स संबंधी दस्तावेजों की मांग कर सकता है।
यह जरूरी है कि जो भी बड़ी नकद राशि जमा की जा रही है, उसका स्रोत स्पष्ट और दस्तावेजीकृत हो। उपयुक्त बिल, रसीद या अन्य प्रमाण संभालकर रखें ताकि बैंक या कर विभाग जब पूछे तो आप उसे दिखा सकें।
स्थानीय खाताधारकों पर असर यह होगा कि अचानक से बड़े जमाओं के कारण उनके बैंकिंग कामकाज में देरी दिख सकती है। कहने का अर्थ यह है कि बिना दस्तावेज के बड़े जमाओं से लेनदेन अवरुद्ध या रोका जा सकता है।
आगे क्या करें
यदि आप बड़ी नकद राशि जमा करने जा रहे हैं तो पहले बैंक से परामर्श कर लें और जरूरी कागजात साथ रखें। साल भर में बार‑बार बड़ी राशि जमा करने की बजाय वैकल्पिक भुगतान माध्यमों का चयन करने पर विचार करें। बैंक द्वारा मांगे जाने पर समय पर स्पष्टीकरण दे दें ताकि अनावश्यक जांच और दिक्कतें टाली जा सकें।
स्रोत: अमर उजाला

