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फिरोजाबाद: एसबीआई लॉकर उत्तराधिकार अर्जी खारिज, कोर्ट ने मायका पक्ष जरूरी कहा

कोर्ट ने कहा कि दिवंगत महिला के माता‑पिता या भाई‑बहन को याचिका में पक्षकार बनाना अनिवार्य है; बैंक केवल ट्रस्टी माना जाएगा।

फिरोजाबाद: एसबीआई लॉकर उत्तराधिकार अर्जी खारिज, कोर्ट ने मायका पक्ष जरूरी कहा
फोटो: अमर उजाला

फिरोजाबाद। सत्र अदालत ने एक दिवंगत महिला के एसबीआई बैंक लॉकर का उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगने पहुंचा पति‑परिवार का आवेदन कानूनी त्रुटि के कारण खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि याचिका में मृतका के मायके पक्ष के कानूनी वारिसों को शामिल करना जरूरी था।

मूल याचिका मई 2024 में जिला अदालत में दाखिल की गई थी। आवेदक जसराना तहसील के ग्राम फरिहा (नया बस्ती) के संजीव शर्मा, उनके बेटे रजत शर्मा और एक नाबालिग बेटा हैं। उनकी पत्नी रश्मि शर्मा का निधन 4 मई 2017 को तेलंगाना में हुआ था।

बैंक और लॉकर की कारवाई

रश्मि का बैंक खाता और लॉकर नंबर 111 फिरोजाबाद बाईपास रोड की मुख्य शाखा में था। लॉकर में किसी का नॉमिनी दर्ज नहीं था। जब परिजन बैंक पहुंचे तब बैंक ने उत्तराधिकार प्रमाणपत्र दिखाने की शर्त रखी। अदालत में एडवोकेट कमिशनर की मौजूदगी में लॉकर खोला गया और सामान, आभूषण व दस्तावेज की सूची तैयार कराकर उनका सरकारी मूल्यांकन कराया गया।

सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग ने देखा कि याचिका में केवल एसबीआई शाखा प्रबंधक को ही विपक्षी पक्ष बनाया गया है। अदालत ने बताया कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के मुताबिक मृतक के निकटतम कानूनी वारिसों जैसे माता‑पिता या भाई‑बहन को भी पक्षकार बनाना अनिवार्य होता है।

अदालत ने कहा कि बैंक सिर्फ लॉकर की सामग्री का संरक्षक या ट्रस्टी है और उसे मामला का एकमात्र विपक्षी माना नहीं जा सकता। आवश्यक पक्षकारों को शामिल न करने को प्रक्रियात्मक खामी मानते हुए मई 2024 से चल रही यह याचिका निरस्त कर दी गई।

इस आदेश का प्रभाव रुपये‑दावों और संपत्ति के बंटवारे से जुड़े समकक्ष मामलों पर भी पड़ेगा। प्रभावित परिवार अब पुनः आवश्यक पक्षकारों को शामिल कर कानूनी कदम उठा सकता है। यदि पाठक इस तरह के मामलों से जुड़े हों तो वे अपने वकील से सलाह लेकर सभी कानूनी वारिसों को याचिका में जोड़ें।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।