गौतमबुद्ध नगर। ग्रेनो वेस्ट में स्थित अजनारा होम्स सोसाइटी में मेंटेनेंस शुल्क को लेकर विवाद बढ़ गया है और अब रोजमर्रा की सुविधाओं पर असर पड़ा है। सोसाइटी ने उन निवासियों के घरों में डिलीवरी बॉयज की एंट्री रोक दी है जिनका मेंटेनेंस पांच महीने से बकाया है।
सोसाइटी प्रबंधन की नई व्यवस्था के मुताबिक जिन लोगों ने पांच महीने तक मेंटेनेंस जमा नहीं किया है, उनके घरों तक वेंडर और डिलीवरी बॉय नहीं जा सकेंगे। ऐसे निवासियों को सामान लेने के लिए गेट तक आना होगा। इस कदम से कई निवासियों में रोष फैल गया और उन्होंने विरोध दर्ज कराया।
नागरिकों की शिकायतें
निवासियों ने कहा है कि मेंटेनेंस देने के खिलाफ नहीं हैं, पर जो सुविधाएं फीस के बदले मिलनी चाहिए वे ठीक नहीं हैं। लंबे समय से लिफ्ट खराब रहने, सफाई न होने और बेसमेंट में सीवर व कचरा जमा रहने की शिकायतें की जा रही हैं। टावर एल की एक लिफ्ट लगभग तीन महीने से खराब होने का आरोप लगाया जा रहा है।
निवासी अंकित ने बताया कि पहले मेंटेनेंस शुल्क नहीं देने वाले कुछ लोगों के घर से कूड़ा उठाने की सुविधा बंद की गई और अब वेंडर और डिलीवरी बॉय की एंट्री को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा कि सुविधाओं में सुधार करने के बजाय मेंटेनेंस नहीं देने वाले निवासियों पर अलग-अलग तरीके से दबाव बनाया जा रहा है।
सोसाइटी के मेंटेनेंस स्टेट मैनेजर राजेंद्र ने बताया कि केवल पांच महीनों से मेंटेनेंस शुल्क नहीं देने वाले निवासियों के घर डिलीवरी बॉयज की एंट्री पर रोक लगाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिश्तेदारों की एंट्री नहीं रोकी जा रही है।
विरोध कर रहे नागरिकों ने व्यवस्थाओं में सुधार की मांग दोहराई। “क्या बोले निवासी सोसाइटी में जब जरूरी सुविधाएं ही ठीक नहीं हैं तो हम मेंटेनेंस किस बात का दें। सब मेंटेनेंस शुल्क देने को तैयार हैं, लेकिन समस्याओं का समाधान भी किया जाना चाहिए।” – दिनकर पांडेय
कई लोगों ने कहा कि दबाव बनाकर विजिटर की एंट्री रोकने से समस्या का समाधान नहीं होगा। “लिफ्ट लंबे समय से खराब है और सफाई की समस्या भी बनी हुई है। इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय विजिटर की एंट्री को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।” – चंदन सिन्हा
अगले कदम में निवासी और प्रबंधन के बीच बैठक कर समाधान की संभावनाएं तलाशने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रभावित लोग अनुरोध कर रहे हैं कि पहले खराब व्यवस्थाओं को ठीक किया जाए और फिर फाइनेंसियल मुद्दों पर कार्रवाई की जाए।
स्रोत: अमर उजाला

