गौतमबुद्ध नगर। ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के तीसरे दिन भी आयोजन चर्चा का केंद्र बना रहा। वाइल्ड लाइफ टुडे के एडिटर सुधीर जे कुमार ने ट्रेड शो के पीछे की वैचारिक सोच और उसके परिणामों पर विशेष बात की।
सुधीर जे कुमार ने कहा कि दूसरे दिन 4,700 बी2बी बैठकें हुईं, 412 समझौतों पर मुहर लगी और 54.2 मिलियन डॉलर के कारोबार की राह खुली। पहले दिन 2,800 से अधिक बैठकों में प्रदेश के करीब 500 एमएसएमई शामिल हुए और उनसे लगभग 140 करोड़ रुपये की व्यावसायिक पूछताछ दर्ज हुई।
लोकल से ग्लोबल की दिशा
एडिटर ने बताया कि यह आयोजन उस विचार को व्यवहारिक रूप दे रहा है जिसे “लोकल से ग्लोबल” कहा जा सकता है। उनका कहना था कि किसी अर्थव्यवस्था का आकार तब बढ़ता है जब स्थानीय बाजार और वैश्विक बाजार के बीच की दूरी कम होती है।
उन्होंने मुरादाबाद के पीतल, भदोही के कालीन, कन्नौज के इत्र, फिरोजाबाद की चूड़ियां और वाराणसी की साड़ियों जैसे परंपरागत उत्पादों का जिक्र किया। कहा गया कि अब इन स्थानीय हुनरों को वैश्विक मानकों, पैकेजिंग और तकनीक से जोड़ने की पहल दिख रही है।
ट्रेड शो में सिंगापुर, वियतनाम, रूस, बेलारूस और जापान जैसी देशों के साथ व्यापारिक संभावनाओं पर बातचीत हुई। सुधारित लॉजिस्टिक्स, कार्गो फैसिलिटी और कोल्ड स्टोरेज जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा नजर आई।
सुधीर जे कुमार ने यह भी कहा कि वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य अकेले बड़े निवेशों से नहीं मिलेगा, बल्कि उसके लिए लाखों छोटे और मझोले उद्यमों को वैश्विक बाजार से जोड़ना जरूरी है। बुंदेलखंड में प्रस्तावित फार्मा पार्क, ललितपुर का बल्क ड्रग पार्क और नोएडा के निकट मेडिकल डिवाइस पार्क जैसे प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स का जिक्र किया गया।
स्थानीय असर और आगे क्या होगा
आयोजन से स्थानीय एमएसएमई को सीधे विदेशी व्यापारिक वार्ताओं का प्लेटफॉर्म मिला है। आयोजकों ने कहा कि अब अगले कदम में बी2बी समझौतों का अनुपालन और निर्यात कनेक्टिविटी पर काम होगा।
यूपीआईटीएस में पेश आई पहलें यह संकेत देती हैं कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब परंपरा और तकनीक को जोड़कर वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।
स्रोत: TV9 भारतवर्ष

