कासगंज। नगर और देहात में किए गए हालिया सत्यापन के बावजूद ग्वालियर रोड पर स्थित संस्कार हॉस्पिटल बिना लाइसेंस चलते रहा और यहां महिलाओं के साथ भ्रूण‑लिंग परीक्षण कराया जा रहा था। यह खुलासा हरियाणा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान हुआ जब सोमवार की शाम छापा मारकर सात लोगों को हिरासत में लिया गया।
जुलाई माह में 15 टीमों ने शहर और ग्रामीण क्षेत्र के 494 अस्पतालों का दौरा कर कागजी सत्यापन कराया था। उन जांचों के बाद 1261 चिकित्सा संस्थानों के लाइसेंस नवीनीकृत किए गए थे, लेकिन फिर भी यह तथाकथित अस्पताल अफसरों की नजरे से बच गया। आरोप है कि यहां उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाली महिलाओं का बिना रोक‑टोक भ्रूण‑लिंग परीक्षण होता था। गैंग जांच कराने के लिए 90 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक की रिश्वत लेता था।
जांच टीमों का गठन
स्थानीय स्वास्थ्य महकमे ने अब सभी निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों की नई जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए तीन टीमों का गठन किया गया है। टीमों का नेतृत्व पीसीपीएनडीटी एक्ट सेल के प्रभारी डाॅ सुशील कुमार, अपंजीकृत अस्पताल सेल के प्रभारी डाॅ धर्मेश्वर श्रीवास्तव और डाॅ जितेंद्र लवानियां करेंगे।
कासगंज के सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि देहात में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी और शहर में बनाई गई तीन टीमों को जांच का काम सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा के सोनीपत से की गई संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों से संबंधित जानकारी और संदेहास्पद लेन‑देन का भी खुलासा हुआ है। मामले में बताया गया है कि गैंग में सरगना, एजेंट और जांच करने वाले शामिल थे, जिन्हें कमीशन के रूप में भुगतान मिलता था।
स्थानीय लोगों ने कहा है कि ऐसे अस्वीकृत अस्पतालों का खुला संचालन स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाता है और महिलाओं की सुरक्षा जोखिम में डालता है। प्रशासन ने लोगों से कहा है कि किसी भी इलाज या जांच के लिए लाइसेंस और डॉक्टरों की पात्रता जरूर पूछें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दें।
स्रोत: अमर उजाला

