अहरौरा। फरहदा गांव में शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन की बैठक हुई जिसमें किसानों ने आगामी आंदोलन की रणनीति तय की। बैठक में विंध्य एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित निर्माण का विरोध मुख्य एजेंडा रहा और कई स्थानीय समस्याओं पर भी चर्चा हुई।
प्रदेश महासचिव प्रह्लाद सिंह ने बैठक में कहा, “किसानों की उपजाऊ भूमि कम मुआवजे पर अधिग्रहीत की जा रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला जनहित के विपरीत है और संगठन विरोध जारी रखेगा।
मांगें और शिकायतें
किसानों ने प्रयागराज से सोनभद्र तक प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण को रद्द करने या फिर उचित मुआवजे और विकल्प के साथ भूमि अधिग्रहण की शर्तों में संशोधन करने की मांग की। वे वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर बनस्थली कॉलेज के पास बने अस्थायी टोल प्लाजा को हटाने की भी मांग कर रहे हैं।
बैठक में गेहूं के समर्थन मूल्य में महज 25 पैसे प्रति किलो की बढ़ोतरी पर नाराज़गी जताई गई। स्थानीय किसानों ने कहा कि इतनी मामूली वृद्धि उनकी लागत भी नहीं ढकती।
किसानों ने जल संसाधन और सिंचाई से जुड़ी कई समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। जोगवा रजबाहा के क्षतिग्रस्त कुलावे और हुसैनपुर बियर से पौनी बैरियर तक भागवत ब्रांच नहर की क्षतिग्रस्त पटरी को दुरुस्त कराने की मांग उठी। नारायणपुर से अहरौरा तक सपाट हो चुके ब्रेकरों को ठीक कराने की भी मांग सामने आई।
अहरौरा डोंगिया बांध समिति ने गड़ई प्रणाली और मेन कैनाल की सभी नहरों का संचालन तीन अक्तूबर से शुरू करने और टेल तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों की सफाई व मरम्मत कराने की मांग की।
बैठक में सिद्धनाथ सिंह, पंचम सिंह, भोलेनाथ गिरि, जयसिंह, नंदलाल पांचाल, संतोष कुमार सिंह और हौसला प्रसाद सहित कई किसान नेता और स्थानीय किसान मौजूद रहे।
आगामी कार्रवाई
बैठक में तय रणनीति के तहत आधिकारिक चैनलों से मांगें नहीं मानीं तो संगठन आंदोलन तेज करेगा। किसानों ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों से शीघ्र पहल की अपील की है और आगे की योजना पर अगले दिनों फिर चर्चा करने का निर्णय लिया गया।
स्रोत: अमर उजाला

