मुरादाबाद। रबी के सीजन में चने की खेती किसानों के लिए फायदे वाली साबित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि सही समय और विधि से बुवाई करने पर अच्छी उपज और लाभ मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर-नवंबर में पंक्ति विधि से बुवाई करनी चाहिए और लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर रखनी जरूरी है। बियाई से पहले बीज का जीवाणु संवर्धन से उपचार कराना आवश्यक बताया गया है। चने की खेती में आमतौर पर केवल 2 से 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।
बुआई का समय व बीज मात्रा
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता ने बताया कि यदि अगेती बुआई करनी हो तो अक्टूबर से 5 नवंबर तक कर लें। समय पर बुआई के लिए 6 नवंबर से 20 नवंबर तक उपयुक्त माना गया है। देर से बुआई करनी हो तो 21 नवंबर से 5 दिसंबर तक बुआई की जा सकती है।
बीज की मात्रा देसी चने के लिए 30 से 35 किलो प्रति एकड़ बताई गई है। काबुली चने की बुआई के लिए 35 से 40 किलो बीज प्रति एकड़ चाहिए। बुआई की गहराई 4-5 सेंटीमीटर रखनी है और पौधे-पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
खाद, सिंचाई और आय
बुआई के लिए 25 से 40 किलो डीएपी प्रति एकड़ की आवश्यकता बताई गई है। पहली सिंचाई बुआई के 15 से 20 दिन बाद कर दें और उसके बाद हर 20 दिन पर सिंचाई जारी रखें। इस तरीके से चने की अच्छी फसल मिलती है।
कृषि विशेषज्ञों ने लागत और उपज का भी अनुमान दिया है। एक एकड़ में अनुमानित लागत 20 से 25 हजार रुपये आती है और पैदावार 18 से 20 कुंटल तक हो सकती है। हरे चने को ताजा रूप में भी बेचा जा सकता है और पकने के बाद भी बाजार मूल्य मिलता है, जिससे किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
मुरादाबाद के किसान इन निर्देशों को अपनाकर कम संसाधन में भी बेहतर उत्पादन और लाभ पा सकते हैं। जो किसान नई किस्म और बीज उपचार अपनाते हैं, उन्हें विशेष रूप से लाभ होने की संभावना है।
स्रोत: News18

