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प्रयागराज: हाईकोर्ट ने कहा, वसीयत की वैधता पर राजस्व अधिकारी का अंतिम फैसला नहीं, कमिश्नर के आदेश पर रोक

हाईकोर्ट ने झांसी के कमिश्नर के 18 अगस्त के आदेश को रोका और विवादित कृषि जमीन की यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।

प्रयागराज: हाईकोर्ट ने कहा, वसीयत की वैधता पर राजस्व अधिकारी का अंतिम फैसला नहीं, कमिश्नर के आदेश पर रोक
फोटो: अमर उजाला

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वसीयत पर आधारित कृषि जमीन के नामांतरण से जुड़े विवाद में अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में राजस्व अधिकारियों द्वारा वसीयत की वैधता का अंतिम फैसला नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने झांसी के कमिश्नर की ओर से 18 अगस्त को पारित आदेश के अमल पर रोक लगा दी है और विवादित जमीन के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। आदेश न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकलपीठ ने अखिलेंद्र प्रताप सिंह की याचिका पर दिया।

हाईकोर्ट का आदेश

अदालत ने स्पष्ट किया कि “वसीयत की वैधता, उसके वास्तविक निष्पादन और वसीयतकर्ता की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर विवाद होने पर उसका अंतिम निर्णय सक्षम सिविल कोर्ट ही कर सकता है। राजस्व अधिकारी वसीयत की वैधता पर फैसला नहीं कर सकता।” इस टिप्पणी के साथ कमिश्नर के आदेश पर रोक लगी।

मामला झांसी जिले की तहसील और गांव पाली पहाड़ी स्थित कृषि भूमि से जुड़ा है। याची का दावा है कि चंदन सिंह ने उसके पक्ष में वसीयत की थी और वसीयत के आधार पर तहसीलदार ने अभिलेख में याची का नाम दर्ज किया था।

इसके बाद प्रतिवादी ने उपजिलाधिकारी के पास अपील दायर की, जो खारिज कर दी गई। मामले को आगे ले जाकर कमिश्नर ने वसीयत के निष्पादन और वास्तविकता पर सवाल उठाते हुए 18 अगस्त के आदेश से तहसीलदार और उपजिलाधिकारी के आदेश रद्द कर दिए और राजस्व अभिलेख से याची का नाम हटाकर प्रतिवादी का नाम दर्ज कर दिया।

याची अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने कमिश्नर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याची के अधिवक्ता विभु राय ने दलील दी कि नामांतरण की कार्रवाई में वसीयत की वैधता का अंतिम निर्णय राजस्व प्रक्रिया के द्वारा नहीं किया जा सकता, इसलिए अंतरिम राहत दी जाए। अदालत ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

स्थानीय लोगों और पक्षकारों के लिए इस फैसले का मतलब यह है कि जमीन संबंधी विवादों में अब सिविल अदालतों का रास्ता अहम रहेगा और राजस्व निर्देशों के अमल पर रोक से वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। आगे की कार्रवाई के लिए पक्षकार सिविल कोर्ट में मुकदमा चलाएंगे।

स्रोत: अमर उजाला

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Vikas Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।