संतकबीरनगर। गोलाबाजार में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में शनिवार को कथा वाचक अतुल कृष्ण शास्त्री ने ध्रुव चरित्र का वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु इकठ्ठा हुए और कथा के बीच कई बार श्रोता भाव-विभोर होते दिखे।
कथा वाचक अतुल कृष्ण शास्त्री ने ध्रुव के बचपन के प्रसंग सुनाए। उन्होंने बताया कि ध्रुव मात्र पाँच वर्ष के थे जब वे राजमहल में खेलते-खेलते सिंहासन पर बैठे उत्तनपाद के निकट चले गए। उस समय उत्तम राजा उत्तनपाद की गोद में बैठे थे और ध्रुव भी गोद में चढ़ने का प्रयास कर रहे थे।
कथा में यह भी बताया गया कि सुरुचि ने ध्रुव को डांटा और कहा कि गोद में आना है तो पहले भगवान का भजन कर इस शरीर का त्याग करना होगा तथा मेरे गर्भ से जन्म लेकर मेरा पुत्र बनना होगा। यह बात सुनकर ध्रुव को काफी कष्ट हुआ और उन्होंने अपनी माँ से कहा कि वे वन जाकर भगवान का भजन करेंगे। दृढ़ संकल्प लेकर वे वन चले गए और मात्र पाँच वर्ष की आयु में भगवान की प्राप्ति कर ली।
कथा स्थल और मौजूद लोग
कथा के दौरान प्रमुख यजमानों में कुसुम देवी, नंदलाल कसौधन और विनोद कसौधन रहे। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष कपीश अग्रहरि भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। साथ में पीयूष सिंह सैंथवार, मनोज कसौधन, अथर्व कसौधन और संतोष गुप्ता भी मौजूद रहे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कथा का माहौल शांत और श्रद्धापूर्ण रहा। कई श्रद्धालुओं ने कथा के अंतिम भाग में आंखें नम होते देखीं और वे धार्मिक भावनाओं में लिप्त दिखे। आयोजन के आयोजकों ने कहा कि कथा श्रृंखला अगले दिनों भी जारी रहेगी और लोग अधिक संख्या में आने का आग्रह कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
कार्यक्रम के आयोजक बताते हैं कि श्रीमद्भागवत कथा का यह ज्ञान यज्ञ कुछ और दिनों तक गोलाबाजार में चलता रहेगा और इसमें और भी धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम जोड़े जाएंगे। जिन लोग कथा सुनना चाहते हैं वे समय से पहुंचें ताकि बैठने की व्यवस्था कराई जा सके।
स्रोत: अमर उजाला

