गंजमुरादाबाद। कल्याणी नदी का उफान और पिछले दो दिनों से हो रही तेज बारिश से बाढ़ प्रभावित गांवों की हालत और बिगड़ गई है। लहरापुर व उसके आसपास के कई मजरे, गाँव चारों तरफ पानी से घिर गए हैं और रास्तों पर पानी भरने से आवागमन बंद है।
प्रभावित गांव और हालात
बाढ़ की चपेट में बेहटाकच्छ, शिवलालपुरवा, कुशराजपुर, भिलोई, बाजीपुरवा, इच्छापुरवा, लोनारी, देवरिया, कछियनपुरवा, पकरियापुरवा, तकिया और छोट्टापुरवा जैसी बस्तियाँ पूरी तरह जलमग्न हैं। लहरापुर के मजरे चिंगरपुरवा और ककरियापुरवा में पानी घरों के अंदर तक पहुँच गया है। कई मार्गों पर पानी घुटनों से अधिक भर चुका है, जिससे लहरापुर-बिरैचामऊ, लहरापुर-चिंगरपुरवा, लहरापुर-ककरिहापुरवा और देवरिया-कछियनपुरवा मार्गों पर आवागमन पूरी तरह ठप है।
फसल और मकानों को नुकसान
खेतों में खड़ी धान की फसल बारिश और बाढ़ के पानी से गिर गई है। पहले यह अनुमान था कि धान को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन लगातार बरसात से फूल और पौधे पानी में गीले होकर झुक रहे हैं और सड़ने का भय बढ़ गया है। कच्चे मकानों के लिए बारिश खतरनाक साबित हो रही है। शनिवार को जमलापुर में प्रमोद पाल की कच्ची दीवारें भरभराकर गिर गईं; किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
प्रशासन अभी तक इन गांवों का जायजा लेने नहीं पहुंचा है, जिससे स्थानीय लोग परेशान हैं। खेत और घर दोनों पर बढ़ते दबाव के बीच लोगों की आवाजाही और रोजमर्रा का काम प्रभावित हो गया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
एसडीएम बृजमोहन शुक्ला ने बताया कि जल्द ही लहरापुर, देवरिया व छोट्टापुरवा आदि गांवों का दौरा कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया जाएगा और फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि 35 फीसदी से अधिक नुकसान पाए जाने पर फसल का मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया लागू की जाएगी।
स्थानीयों का कहना है कि जलनिकासी और आपूर्ति के इंतजाम चाहिए ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके। प्रशासन के दौरे और सर्वे के बाद ही आगे के राहत उपाय और मुआवजा प्रक्रियाओं की स्पष्टता आएगी।
स्रोत: अमर उजाला

