कुशीनगर। शास्त्रियों और समाज के बीच चल रही सनातन धर्म पर बहस के बीच जगद्गुरु स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने यह कहा कि धर्म का स्वरूप अपरिवर्तनीय है और समय के नाम पर उसकी व्याख्या बदलना अनुचित है। उन्होंने धर्म की सच्ची समझ के लिये पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा से अध्ययन की आवश्यकता बतायी।
जगद्गुरु ने सनातन शब्द को सरल रूप में परिभाषित करते हुए कहा कि 'सदा भव' यानी जो भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों में एक समान रहे, वही सनातन है। उन्होंने कहा, जिस प्रकार अग्नि का स्वाभाविक गुण दाहकता है और यदि वह बदल जाए तो वह अग्नि नहीं रहती, वैसे ही धर्म का स्वरूप भी अपरिवर्तनीय होना चाहिए।
गूगल पर निर्भर बहस पर तीखा विरोध
जगद्गुरु ने उन लोगों की निन्दा की जो धर्म पर बहस करते समय गूगल जैसे स्रोतों पर निर्भर रहते हैं। उनका कहना था कि वेदों, रामायण, श्रीमद्भागवत और महाभारत का अध्ययन किए बिना धर्म पर बोलना प्रपंच है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवित माता‑पिता की सेवा और पितरों का तर्पण ही सच्ची संतान की पहचान है।
उन्होंने पुराणों के श्लोक के हवाले से कहा कि माता‑पिता के जीवित रहते उनकी आज्ञा मानना और उनके दिवंगत होने पर श्राद्ध, तर्पण व गया में पिंडदान कर्तव्य है। इसके बिना कोई पुत्र या पुत्री कहलाने योग्य नहीं है। जगद्गुरु ने यह भी कहा कि जीवन की हर उपलब्धि में देवी‑देवताओं, ऋषि‑मुनियों और संतों का अंश होता है, इसलिए उनका और गौमाता का सेवाभाव रखना चाहिए।
जगद्गुरु ने दिल्ली के कुछ युवाओं के व्यवहार पर भी टिप्पणी की और कहा कि वे भारत के युवक‑युवती नहीं कहे जा सकते। उन्होंने माता‑पिता को बच्चों को गर्भ से संस्कार देने की आवश्यकता और मनुस्मृति के श्लोक का उल्लेख किया: ‘लालयेत् पञ्च वर्षाणि, ताडयेत् दश वर्षाणि। प्राप्ते सम्प्राप्ते षोडशे वर्षे पुत्रं मित्र समाचरेत।’
जाति और जाति जनगणना पर भी उन्होंने विचार रखा। उनका कहना था कि हमारी व्यवस्था वर्ण पर आधारित थी, न कि द्वेष और भेदभाव के लिये। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के बाद भी जातिगत लाभ लेने को छलावा बताया गया है और ऐसे मामलों से समाज में बटवारा बढ़ता है।
स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के वक्तव्यों का प्रभाव सामाजिक विचार‑विमर्श पर पड़ेगा। धार्मिक नेतागण और परिवारिक परंपराओं के समर्थक इन बातों को लेकर आगे बयान दे सकते हैं। पाठक अधिक जानकारी के लिये स्थानीय धार्मिक संस्थानों या आयोजकों से संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत: अमर उजाला

