लखनऊ। अक्तूबर आ चुका है और ठंड बढ़ने के साथ कई परिवारों ने गर्म पानी के लिए गीजर खरीदने की योजना बना ली है। बाजार में आमतौर पर दो तरह के गीजर मिलते हैं: गैस गीजर और इलेक्ट्रिक गीजर।
गैस गीजर LPG या PNG सिलिंडर की मदद से पानी गर्म करते हैं। वहीं इलेक्ट्रिक गीजर सीधे बिजली से काम करते हैं। खरीदते समय उपभोक्ता को यही जानना होता है कि किस तरह का गीजर उनके घर के लिए बेहतर और सुरक्षित रहेगा।
गैस और बिजली: मूल फर्क
गैस गीजर में आग की जरूरत होती है और इसके लिए सिलिंडर या पाइप्ड नेचुरल गैस की व्यवस्था जरूरी है। इससे पानी तुरंत गर्म होता है और लगातार फ्लो में गर्म पानी मिलता है। इलेक्ट्रिक गीजर में हीटर बंद होता है और टैंक में पानी गर्म करके रखा जाता है। दोनों के काम करने का तरीका अलग है इसलिए जोखिम और उपयोग के तरीके भी भिन्न होते हैं।
सुरक्षा के नजरिये से कहा जाए तो दोनों में अलग‑अलग चुनौतियां आती हैं। गैस गीजर में सही वेंटिलेशन, नियमित लीकेज जांच और प्रमाणित इंस्टॉलेशन जरूरी है ताकि गैस रिसाव या जलने का खतरा कम रहे। इलेक्ट्रिक गीजर में वॉटरप्रूफिंग, अर्थिंग और ओवरहीटिंग सुरक्षा तंत्र की सही व्यवस्था अहम है ताकि शॉर्ट सर्किट या बिजली से जुड़े हादसे न हों।
स्थानीय परिवारों के लिए चयन में इस्तेमाल, लागत और घर की सुविधा मायने रखती है। जहां PNG लाइन उपलब्ध हो और वेंटिलेशन ठीक हो, वहां गैस गीजर सुविधाजनक और तुरंत गर्म पानी देने वाला विकल्प बनता है। जिन घरों में बिजली की स्थिर आपूर्ति और सही इलेक्ट्रिक फिटिंग है, वहां इलेक्ट्रिक गीजर सुरक्षित और सुविधाजनक रहता है।
खरीदने से पहले प्रमाणित ब्रांड और अधिकृत सर्विस से इंस्टॉलेशन कराएं। नियमित मेंटेनेंस और सर्विसिंग पर ध्यान दें। खरीदते समय भरोसेमंद दुकानदार से गारंटी और सर्विसिंग की बात स्पष्ट कर लें ताकि सर्दियों में गर्म पानी का उपयोग सुरक्षित तरीके से चल सके।
स्रोत: अमर उजाला

