लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधान परिषद के शिक्षक व स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव के लिए बीजेपी ने अब जमीन पर अपनी रणनीति लागू करना शुरू कर दिया है। 23 अक्टूबर को 11 सीटों पर मतदान तय है और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।
पार्टी ने इन 11 सीटों के लिए सभी उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। सूची में पांच ब्राह्मण चेहरों को टिकट दिया गया है। इनमें वाराणसी शिक्षक से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक से हरिकिशोर तिवारी, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक से ध्रुव त्रिपाठी, लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक से श्रीचंद शर्मा शामिल हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर रखी गई है।
UGC मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल
पार्टी के अंदरूनी इनपुट बताते हैं कि UGC के सवालों को लेकर सवर्ण समाज के कुछ हिस्सों में नाराजगी है। इस नाराजगी को कम करने के लिए बीजेपी ने ब्राह्मण चेहरों को अलग-अलग स्नातक क्षेत्रों में एक्टिव किया जाएगा। पार्टी के संगठन वाले नेता मतदाताओं के बीच जाकर UGC से जुड़े प्रश्नों और भ्रम को हटाने की कोशिश करेंगे।
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों से सीधे जुड़े हैं। इसलिए UGC और शैक्षिक नीतियों पर चर्चा इन मतदाताओं के बीच तेज है। यहां मतदाता सीमित और पंजीकृत हैं, इसलिए व्यक्तिगत संपर्क चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
बीजेपी का दूसरा बड़ा फोकस शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर है। योगी सरकार ने करीब 10 साल से प्रमोशन का इंतजार कर रहे सरकारी शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू की है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 70 हजार शिक्षकों को प्रमोशन दिए जाने की तैयारी है और सभी जिलों को वरिष्ठ शिक्षकों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की ओर से जिलों से वरिष्ठ शिक्षकों की सूची मांगी जा चुकी है। पार्टी इसे शिक्षक वर्ग के बीच सरकार की पहुँच दिखाने और संवाद का जरिया मान रही है। शिक्षक संगठनों में यह मुद्दा वर्षों से रहा है, इसलिए चुनाव से पहले इस प्रक्रिया का शुरू होना अहम माना जा रहा है।
इन सीटों का चुनाव पार्टी संगठन और वोटर तक पहुंच का टेस्ट होगा। बीजेपी की असली परीक्षा एजेंडा को छोटे मतदाता समूहों तक पहुंचाने और माइक्रो मैनेजमेंट रणनीति में तय परिणाम लाने की होगी।
स्रोत: TV9 भारतवर्ष

