लखनऊ। राज्यसभा चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के विपक्षी एकता के आह्वान पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तेज प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संविधान नहीं, बल्कि अखिलेश यादव खतरे में हैं।
राजभर ने सीधे शब्दों में कहा कि 2017 से अखिलेश यादव लगातार कह रहे हैं कि संविधान खतरे में है. जबकि सच यह है कि संविधान सुरक्षित है और खतरे में खुद अखिलेश यादव हैं. उन्होंने सपा अध्यक्ष की राजनीति पर भी सवाल उठाए।
राजनीतिक आरोप‑प्रत्यारोप
ओम प्रकाश राजभर ने यह भी कहा कि 20 प्रतिशत आबादी वाले मुसलमानों ने वोट देकर चार बार यादव को मुख्यमंत्री बनाया लेकिन अखिलेश यादव के मन में एक बार भी यह विचार नहीं आया कि कम से कम किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए. उन्होंने सपा के ‘भाईचारे के चुनाव’ वाले बयान पर तीखा हमला बोला और कहा कि “यह भाईचारे का चुनाव नहीं, बल्कि दौलत का चुनाव है.”
पीडीए को लेकर राजभर ने कहा कि इसमें परिवारवाद हावी है. उन्होंने रामगोपाल, दौलतमंद का जिक्र करते हुए कहा कि बस अब “अपराधी” का नाम घोषित किया जाना बाकी है. राजभर ने सपा‑कांग्रेस गठबंधन पर भी निशाना साधा और पुरानी पार्टियों में बने तालमेल का हवाला दिया।
राजभर ने 2022 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वह सपा के साथ थे और पार्टी 125 सीटों तक पहुंची. उन्होंने दावा किया कि अंबेडकरनगर की पांचों सीटें, आजमगढ़ की दस सीटें, गाजीपुर की सात सीटें, बलिया, मऊ समेत कुल 62 सीटों पर सपा को जीत सुभासपा की वजह से मिली.
- अंबेडकरनगर: 5 सीटें
- आजमगढ़: 10 सीटें
- गाजीपुर: 7 सीटें
- कुल दाव: 62 सीटें
राजभर ने कहा कि आज अखिलेश यादव को सहारा देने वाला कोई नहीं है और उन्हें पता चल चुका है कि उनकी सरकार नहीं आने वाली है. इसलिए वे अपने लिए व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं. उनके इस बयान से सियासी हलकों में बहस तेज हो गई है।
आगे का सीन
यह बयान राज्यसभा चुनावों से पहले विपक्षी खेमे में उठे विवादों को और हवा देगा। स्थानीय नेताओं और पार्टियों के रणनीतिक कदमों पर अब नजर बनी रहेगी। जनता और समर्थक अगली हलचल पर प्रतिक्रिया देंगे और राजनीतिक दल अपनी तैयारियों को तेज करेंगे।
स्रोत: ABP न्यूज़

