वाराणसी। परिषदीय विद्यालयों में अब कक्षा एक और दो के बच्चों को संस्कृत से परिचित कराया जाएगा। यह व्यवस्था सत्र 2027-28 से लागू की जाने वाली है और इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) स्तर पर विशेष मॉड्यूल तैयारी में है।
बेसिक शिक्षाधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में अब तक संस्कृत को औपचारिक तौर पर कक्षा तीन से ही पाठ्यक्रम में रखा जाता था। शुरुआती स्तर पर भाषा का परिचय न होने के कारण कई विद्यार्थियों को कक्षा तीन में विषय समझने में कठिनाई होती थी, इसलिए कक्षा एक-दो से बेस तैयार करने का निर्णय लिया गया है।
मॉड्यूल में क्या होगा
तैयार किए जा रहे मॉड्यूल में प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को लिखने-पढ़ने पर तुरंत जोर नहीं दिया जाएगा। शुरुआत में मौखिक रूप से भाषा से परिचय कराया जाएगा और बच्चों को संस्कृत के सामान्य शब्द सिखाए जाएंगे। इसमें गिनती, फल, सब्जी और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं के नाम शामिल होंगे ताकि बोलचाल की समझ बने।
भूपेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि मौखिक परिचय से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और जब वे कक्षा तीन में संस्कृत को विषय के रूप में पढ़ेंगे तो शब्द और वाक्य समझने में उन्हें परेशानी कम होगी। शिक्षकों के प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री दोनों पर काम किया जा रहा है।
स्थानीय प्राथमिक स्कूलों का कहना है कि यदि बच्चे छोटे स्तर पर भाषा के साथ सहज हो जाएं तो उच्च कक्षाओं में सीखने की गति बेहतर होगी। अध्यापकों ने मॉड्यूल पर कार्यशाला और प्रशिक्षण की माँग भी उठाई है ताकि वे नई पद्धति को कक्षा में ठीक तरह लागू कर सकें।
आगे क्या होगा
अब एससीईआरटी द्वारा तैयार मॉड्यूल को जिलास्तर पर भेजने और शिक्षक प्रशिक्षण की रूपरेखा तय करने की प्रक्रिया पूरी होगी। जिसके बाद परिषदीय विद्यालयों में नए सत्र से यह बदलाव लागू कर दिया जाएगा। अभिभावक और शिक्षण समुदाय मॉड्यूल के विवरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला

