वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में बाबा लाट भैरव का रथारोहण और विवाहोत्सव रविवार को धूमधाम से मनाया गया। रजत मुखौटे का विधिवत शृंगार कर उसे रथ पर स्थापित कर सिर पर मौर धारण कराया गया जिससे भक्तों में गहरा उत्साह दिखा।
बरात और यात्रा
बरात का नेतृत्व श्री कपाल भैरव अथवा लाट भैरव प्रबंधक समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल ने किया। उन्होंने शुभता का प्रतीक नारियल फोड़कर “हर-हर महादेव” के उद्घोष के साथ शोभायात्रा निकालने की शुरुआत की। रथ पर बरात संयोजक विक्रम सिंह राठौर अपने सहयोगियों के साथ पारंपरिक धोती-कुर्ता-साफा में बैठे दिखे और भक्तों के चढ़ावे बाबा को अर्पित होते रहे।
मार्गभर भक्तों ने पुष्पवर्षा की और आरती उतारकर स्वागत किया। डमरू दलों के सौ से अधिक सदस्य डमरुओं की गूंज के साथ यात्रा में शामिल रहे। महिलाएं छतों और बरामदों से फूल बरसाकर सुख-समृद्धि की कामना कर रही थीं और घरों के द्वार पर लोग सकुटुंब बाबा की आरती उतारकर दर्शन पा रहे थे।
बरात हरतीरथ, विशेश्वरगंज चौराहा होते हुए काल भैरव मंदिर पहुँची जहां समिति ने बाबा का विशेष शृंगार कर आरती की। इसके बाद यात्रा जतनबर, दूध कटरा, कतुआपुरा, अम्बियामंडी, बलुआबीर, हनुमान फाटक और तेलियाना होकर नउआ पोखरा स्थित लाट भैरव बाजार में कुछ देर के लिए रुकी। भक्तों की भीड़ इतनी बढ़ी कि रथ का पहिया धीमा पड़ गया।
तीन किमी के बरात मार्ग को पार करने में करीब 10 घंटे लगे। बरात जलालीपुरा होते हुए कज्जाकपुरा स्थित कपाल मोचन कुंड पहुँची। नगर वधुओं ने बाबा के चरणों में अपनी मनमोहक प्रस्तुति कर हाजिरी लगाई और महिलाएँ मंगल गीत गाती रहीं।
विधि-विधान और आगे की तैयारियाँ
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ द्वार पूजन, परछन और विवाह की अन्य रस्में शास्त्रों के अनुसार पूरी की गईं। भैरवी कूप की पांच परिक्रमा के बाद रजत मुखौटे को विग्रह पर धारण कराया गया और विवाह संपन्न होने पर आरती की गई। रविवार शाम छह बजे भंडारा रखा गया है।
बरात में समिति के उपाध्यक्ष बसंत सिंह राठौर, प्रधानमंत्री मुन्ना लाल यादव, कोषाध्यक्ष छोटन केशरी, नंदलाल प्रजापति, बच्चे लाल बिंद, शिवम अग्रहरि, निक्की जायसवाल, सुशील जायसवाल, हिमांशु अग्रहरि, आशीष कुशवाहा, महेंद्र जायसवाल, नवीन, सचिन और अरविंद सहित कई लोग शामिल रहे। आयोजन के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी बनाई गई थी।
स्रोत: अमर उजाला

