बलिया। शुक्रवार को गंगा नदी का जलस्तर तेजी से घटने लगा और सरयू का जलस्तर स्थिर पाया गया। जलस्तर में सुधार से तटीय इलाकों में रहने वालों को सुकून मिला, लेकिन हालत पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ के बाद बस्तियों से पानी धीरे-धीरे निकल रहा है। अधिकारियों के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों के बाबूबेल, गरया, रुद्रपुर, बेलहरी, प्रबोधपुर, डांगरबाद, शुक्ल छपरा, धरमपुरा, मझौवां, सुघर छपरा, उदई छपरा और उपाध्याय टोला के कई हिस्सों में अब भी समस्याएं बनी हुई हैं। इन बस्तियों की आबादी करीब 18 हजार है जो बाढ़ से प्रभावित हुई थी।
जलस्तर और औपचारिक रिपोर्ट
केंद्रीय जल आयोग के गायघाट गेज के अनुसार शुक्रवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 58.50 मीटर दर्ज किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि जलस्तर में एक सेमी प्रति घंटे की दर से घटाव हो रहा है। एक अन्य प्वाइंट पर कहा गया है कि गंगा नदी खतरे के निशान 57.615 मीटर से 885 सेमी ऊपर बह रही है।
बेल्थरारोड में सरयू नदी शुक्रवार को स्थिर हो गई और इसका जलस्तर 65.01 मीटर पर आया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरयू लाल निशान से एक मीटर ऊपर बह रही थी और अब हालात स्थिर हैं। आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में कमी का अनुमान जताया है।
हालांकि पानी घट रहा है, बस्तियों में सड़ांध, कीचड़ और गंदगी जमा होने से स्थानीय लोग परेशान हैं। पानी के साथ बहकर आई जलजन्य और अपशिष्ट सामग्री की वजह से दुर्गंध फैल रही है। लोग डायरिया, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों के फैलने की चिंता जता रहे हैं।
बाढ़ पीड़ित संजय मल्लाह ने कहा, “बाढ़ के बाद घरों में घुसे पानी ने हमारी जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया।” पीड़ितों ने प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशक दवा का छिड़काव करने और सफाई अभियान तेज करने की मांग की है।
प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा हुआ है और निगरानी जारी है। अधिकारी कटान पर भी नजर बनाए हुए हैं और स्वास्थ्य खतरों से निपटने के लिए साफ-सफाई और कीटनाशक छिड़काव के निर्देश दिए जा रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला

