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फतेहपुर: मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में डॉक्टर नहीं पहुंचे, कई मरीज बिना इलाज लौटे

कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में वरिष्ठ डॉक्टर गायब रहे; असोथर पीएचसी में 20 जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं और कुछ केंद्रों पर ओपीडी में जूनियर डॉक्टर ही थे।

फतेहपुर: मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में डॉक्टर नहीं पहुंचे, कई मरीज बिना इलाज लौटे
फोटो: अमर उजाला

फतेहपुर। रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में कई स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी नहीं रही। इसके कारण कुछ मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा और जिन्हें सामान्य परेशानी थी उन्हें ही ओपीडी पर देखा गया।

बहुआ पीएचसी में रविवार सुबह 11:43 बजे प्रभारी डॉक्टर के कक्ष में कुर्सी खाली मिली। फार्मासिस्ट अनिल वर्मा दवा कक्ष में बैठे थे और वार्ड बॉय मरीजों के पर्चे बना रहे थे। अस्पताल में मरीज खुशी, नीतू, बेनू, भूरा, पारुल, जयसिंह, विजय लक्ष्मी समेत अन्य डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे।

आरोग्य मेला प्रभावित

पीएचसी असोथर में रविवार दोपहर तक कुल 40 मरीज ओपीडी पर पहुंचे। चिकित्सक डॉ. महेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि इन दिनों खांसी और वायरल बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। फार्मासिस्ट दिनेश कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में 20 जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उपचार सीमित रहा।

नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र औंग में भी मेले पर असर पड़ा। डॉ. शालिनी ने बताया कि रविवार को सामान्यत: मरीज कम आते हैं और रविवार को आरोग्य मेले में 14 मरीज पहुंचे। इनमें जुकाम, बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द, शुगर व बीपी की शिकायतें थीं।

जिले के कई पीएचसी व सीएचसी में हर रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में डॉक्टरों के बैठने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन स्थानीय लोगों ने बताया कि अक्सर वरिष्ठ चिकित्सक नहीं पहुंचते और सिर्फ जूनियर डॉक्टर या फार्मासिस्ट ही उपलब्ध रहते हैं। इससे गंभीर बीमारियों के मरीजों को जिला अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है।

आगे की कार्रवाई

सीएमओ डॉ. यूबी सिंह ने कहा, “पीएचसी और सीएचसी में प्रत्येक रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में डॉक्टरों के बैठने के निर्देश हैं। अगर किसी पीएचसी में डॉक्टर नहीं बैठते हैं तो शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि दवाइयों की कमी की शिकायतों की जानकारी ली जाएगी।

स्थानीय मरीज अब चिंता में हैं और कई लोग जिला अस्पताल जाने को मजबूर रहे। अधिकारीयों की जांच के बाद ही तय होगा कि अगली बार मेले में डॉक्टरों की अनुपस्थितियों को कैसे रोका जाए।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।