दिलदारनगर। सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी कर फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र बनवाने और उसी के आधार पर नगर पंचायत में वरासत हासिल करने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई नगर पंचायत के वार्ड 8 के सभासद सुरेंद्र गुप्ता की शिकायत और न्यायालय के आदेश के बाद की गई।
पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए कहा है कि आरोपियों में मोहन प्रसाद की पत्नी ललिता देवी और उनके पुत्र मनीष व अनीश शामिल हैं। शिकायत में कहा गया है कि अलग-अलग समय पर अलग-अलग जातियों का लाभ उठाने का प्रयास किया गया। थाना प्रभारी संतोष कुमार राय ने बताया कि दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है।
जांच और शिकायत का क्रम
शिकायत में आरटीआई के तहत प्राप्त अभिलेखों का हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि 1998, 2000, 2010 और 2013 में मिले अभिलेखों में मोहन प्रसाद, उनकी पत्नी और पुत्रों की जाति पिछड़ी जाति दर्ज होने और इसी वर्ग का प्रमाणपत्र बनवाए जाने का दावा किया गया है।
- 1998
- 2000
- 2010
- 2013
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मोहन प्रसाद और उनके भाई श्यामबिहारी ने कई मौकों पर बैनामों में खुद को पिछड़ी जाति बताया था। बाद में दस्तावेजों में पिता का नाम बदलकर अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराया गया, जिससे नामांतरण निरस्त कराकर वरासत हासिल करने का प्रयास किया गया।
शिकायत छह मार्च 2026 को सबसे पहले पुलिस अधीक्षक को दी गई थी। कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने न्यायालय का सहारा लिया। अदालत के निर्देश पर अब पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
थाना प्रभारी ने कहा है कि मामले में न केवल प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है बल्कि अन्य संबंधित तथ्यों का भी सतही और गहन दोनों तरह से परीक्षण किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने मामले को देखते हुए कहा कि यदि दस्तावेजों में असलियत पाई गई तो संबंधित संपत्तियों के हक और सरकारी रिकॉर्ड में संशोधन की मांग की जाएगी। जो भी जानकारी रखने वाले हों, वे संबंधित थाने से संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत: अमर उजाला

