लखीमपुर खीरी। तालाबों और अन्य जलस्रोतों में बेकार मानी जाने वाली जलकुंभी अब गांव की महिलाओं के लिए आमदनी का साधन बन रही है। खीरी की थारू महिलाओं ने जलकुंभी से बने हाथ की बनी डाल-डलियों और अन्य उपयोगी सामग्री नोएडा में प्रदर्शित की।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शन
नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित पांच दिवसीय यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में खीरी के दो महिला स्वयं सहायता समूहों ने स्टॉल लगाया। स्टॉल पर देश और विदेश से आए खरीदारों ने इन उत्पादों की सराहना की और खरीदारी भी की।
- तिथि: 25 से 29 सितंबर
- स्थान: नोएडा, यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो
थारू जनजाति से जुड़े मालती प्रेरणा समूह की वनदेवी ने जलकुंभी से तैयार किए गए वस्त्रों और आसान उपयोग की चीजें प्रदर्शित कीं। वनदेवी ने कहा, “सरकार के इस प्रयास से हम महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है।” कई खरीदार आयोजक से उत्पाद बदलने की प्रक्रिया जानने के लिए भी रुके।
दूसरे समूह नवी स्वयं सहायता समूह की शफीका ने लेदर क्राफ्ट के तहत जूते, चप्पल और बेल्ट रखे। शफीका के स्टॉल पर लेदर क्राफ्ट की वस्तुओं की अच्छी मांग रही और उन्होंने करीब दो लाख रुपये का कारोबार किया।
उपायुक्त स्वत: रोजगार जितेंद्र मिश्र ने कहा, “खीरी की महिला समूहों को नोएडा जैसे बड़े मंच पर उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिला। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।”
यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जलकुंभी जैसी समस्या को आर्थिक अवसर में बदलने की दिशा में मिली एक कामयाबी मानी जा रही है। अब क्षेत्र में और समूहों को भी बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी पर ध्यान दिया जा रहा है।
स्रोत: अमर उजाला

