ललितपुर। जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रखी लाखों रुपये की अल्ट्रासाउंड मशीनें कई महीनों से उपयुक्त उपयोग नहीं हो पा रहीं। रेडियोलॉजिस्ट या प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टर न होने की वजह से मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है और वे वापस लौट रहे हैं।
हर रोज सीएचसी केंद्रों पर लगभग 100 से 150 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से 25 से 30 मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच की जरूरत पड़ती है, लेकिन मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद जांच नहीं हो पाती। शासन ने करीब तीन वर्ष पहले छह केंद्रों पर एक-एक अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई थी; इन मशीनों की कीमत लाखों में बताई जाती है।
मरीजों पर असर
मशीनें बंद होने से ग्रामीण मरीजों को निजी जांच केंद्रों या जिला मुख्यालय के मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बढ़ जाता है। जिला मेडिकल कॉलेज में रोजाना 100 से 140 मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंचते हैं, जबकि निजी केंद्रों पर प्रतिदिन 200 से 250 मरीज जांच कराते हुए देखे जाते हैं।
जिले के छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरधा, बार, महरौनी, मड़ावरा, तालबेहट और जखौरा में एक-एक अल्ट्रासाउंड मशीन लगी हुई है। सरकारी बजट से खरीदी गई इन महंगी मशीनों का उपयोग न होने से स्वास्थ्य सेवाओं की क्षति हुई है और मरीजों को अतिरिक्त खर्च सहना पड़ रहा है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि शासन स्तर से रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो रही है, इसलिए मशीनें चल नहीं पा रही हैं। कई बार दूरस्थ या विकल्प के उपाय खोजे गए पर अभी तक स्थायी तैनाती नहीं हुई है।
प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.वीरेंद्र सिंह ने कहा, “समुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध हैं। रेडियोलॉजिस्ट मिलने पर अल्ट्रासाउंड मशीनों से जांच शुरू कराई जाएगी।”
आगे क्या होगा
स्थानीय लोग चाहते हैं कि जल्द से जल्द रेडियोलॉजिस्ट तैनात कर दिए जाएं ताकि गांवों का मरीज जिला मुख्यालय तक न भटकना पड़े। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि शासन से तैनाती के आदेश का इंतजार है और जैसे ही अनुमति मिलेगी, मशीनों का प्रयोग शुरू कराया जाएगा।
स्रोत: अमर उजाला

