ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में कला संकाय विकास कार्यक्रम के तहत संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालय के और कॉलेज के शिक्षक व छात्र‑छात्राएं मौजूद रहीं। कार्यक्रम का निर्देशन प्राचार्य प्रो ओमप्रकाश शास्त्री ने किया।
महोत्मा गांधी काशी विद्यापीठ के असिस्टेंट प्रोफेसर मुकेश पंत ने कहा कि मनोविज्ञान में करियर की असीम संभावनाएं हैं और यह एक रोजगारपरक विषय है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, शोध, उद्योग, प्रशासन, परामर्श और सामाजिक सेवा में करियर बना सकते हैं।
मनोविज्ञान का सामाजिक और व्यक्तिगत महत्व
डॉ.आशा साहू ने संगोष्ठी में कहा कि मनोविज्ञान व्यक्ति को स्वयं समझने और दूसरों के साथ स्वस्थ संबंध बनाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि समाज में बेहतर संचार, सहयोग, समायोजन और संघर्ष समाधान तथा मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में यह विज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम संयोजक और मनोविज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि विभाग का उद्देश्य सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान नहीं बल्कि विद्यार्थियों में मनोवैज्ञानिक सोच, मानवीय संवेदनशीलता, शोध क्षमता और व्यावहारिक समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना भी है।
मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सूबेदार यादव ने खास तौर पर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के दुरुपयोग से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने साथ ही पाठ्यक्रम, मिडटर्म परीक्षा और अधिन्यास के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी।
संगोष्ठी में शामिल छात्र‑छात्राओं ने भी प्रश्न किए और प्रशिक्षण और करियर से जुड़ी शंकाओं का समाधान पाया। महाविद्यालय में ऐसे कार्यक्रमों के आगे भी नियमित आयोजन किये जाने की बात कही गई, ताकि छात्रों की शोध और व्यावहारिक योग्यता बढ़े।
स्रोत: अमर उजाला

