लखनऊ। आजकल इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स से कमाई करना कई लोगों का पेशा बन चुका है और सोशल मीडिया पर सक्रिय कई लोग पूछते हैं कि क्या इस आय पर टैक्स लगता है। इनकम‑टैक्स विभाग के नियमों के मुताबिक सोशल मीडिया से होने वाली कमाई करयोग्य मानी जाती है।
डिजिटल क्रिएटर्स यदि ब्रांड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप, एफिलिएट मार्केटिंग या वीडियो व्यूज़ से पैसे कमाते हैं तो उन आय पर टैक्स देना जरूरी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये आमदनी व्यवसाय या पेशे की तरह देखी जाएगी और नियमानुसार टैक्स स्लैब/दरें लागू होंगी।
किस तरह दर्ज करें कमाई
जो भी कमाई प्लेटफॉर्म से होती है, उसे सही तरीके से अकाउंट में दर्ज करना जरूरी है। खर्च, प्रोमोशन की लागत और अन्य व्यय खर्चे घटाकर टैक्सेबल इनकम निकाली जाती है। छोटे क्रिएटर्स को भी आय का लेखा‑जोखा रखना चाहिए ताकि सालाना आयकर रिटर्न में सही जानकारी दी जा सके।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन की जरुरत अलग नियमों पर आधारित है और यह निर्भर करता है कि क्रिएटर की कुल टर्नओवर कितनी है और सेवाओं की प्रकृति क्या है। डिजिटल सर्विसेज पर जीएसटी के संदर्भ में अलग दिशानिर्देश होते हैं, इसलिए रजिस्ट्रेशन की शर्तें और दायरे को ध्यान से देखना होगा।
स्थानीय क्रिएटर्स के लिए यह जरूरी है कि वे किसी कर सलाहकार से सलाह लेकर अपना पैन निरंतर सक्रिय रखें और आयकर रिटर्न समय पर भरें। सही तरीके से रजिस्ट्रेशन और रिटर्न भरने से जुर्माना और नोटिस से बचा जा सकता है।
अगर आप सोशल मीडिया से कमाई शुरू करने वाले हैं या पहले से कर रहे हैं, तो अपनी आमदनी का लेखा‑जोखा रखें और आवश्यक रजिस्ट्रेशन व रिटर्न की तिथियों का पालन करें। कर से जुड़ी जटिलताओं के लिए पेशेवर सलाह लें।
स्रोत: अमर उजाला

