बाराबंकी। घाघरा नदी की तेज कटान से जिले के हेतमापुर इलाके में भारी तबाही मची है। कई घर नदी की धारा में समा चुके हैं और मस्जिद का बड़ा हिस्सा कटान की चपेट में आ गया है।
कटान प्रभावित इलाके में रहने वाले परिवारों का कहना है कि जिन घरों पर अभी खतरा मंडरा रहा है, वहां पर बस एक ही दुआ है कि उनका बचा हुआ आशियाना सुरक्षित रहे। वहीं कई लोग अपनी आंखों के सामने जीवनभर की कमाई नदी में बहते देख घबराए हुए हैं।
विधायक का दौरा और आरोप
कटान प्रभावित इलाके का दौरा करने पहुंचे रामनगर के सपा विधायक फरीद महफूज किदवई ने मौके के हालात देखकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी आंखों से बेहद भयावह तबाही देखी है.”
किदवई ने कहा, “मस्जिद कट चुकी है और दर्जनों घर नदी में समा चुके हैं, जबकि बचे हुए परिवार अपने घरों को बचाने की दुआ कर रहे हैं.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कटान रोकने के लिए करीब पांच महीने पहले करोड़ों रुपये का टेंडर हुआ था, जिसमें नदी के किनारे पत्थर लगाने का काम शामिल था।
विधायक ने सवाल उठाया कि अगर टेंडर हो चुका था और विभाग के पास पैसा भी पहुंच चुका था, “तो समय रहते काम क्यों नहीं कराया गया?” उन्होंने कहा, “यदि समय रहते नदी के किनारे पत्थर लगाए जाते तो शायद कटान की रफ्तार को रोकने में मदद मिल सकती थी.”
किदवई ने जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई और मामले की जांच की मांग की। उन्होंने यह भी कहा, “यह केवल मिट्टी या जमीन के कटने का मामला नहीं है, लोगों के पूरे-पूरे घर उजड़ रहे हैं, परिवार बेघर हो रहे हैं और लोग अपनी आंखों के सामने अपनी जिंदगी भर की कमाई नदी में समाते देख रहे हैं.”
विधायक ने अंत में कहा, “अब उनकी सबसे बड़ी दुआ है कि हेतमापुर का ऐतिहासिक मंदिर सुरक्षित रहे.” प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बची हुई संपत्ति और धार्मिक स्थलों को बचाना है।
इस समय टेंडर, भुगतान और निर्धारित कार्य समय पर न होने संबंधी विधायक के आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। स्थिति गंभीर बनी हुई है और प्रभावितों की सुरक्षा के लिए तात्कालिक कदम आवश्यक हैं।
स्रोत: ABP न्यूज़

