लखनऊ। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में दशकों पुराने समाजिक समीकरण को फिर से कायम करने की कोशिश तेज कर दी है। पार्टी ने कई सामाजिक समूहों का संतुलन बनाते हुए अपनी टीम में बड़े फेरबदल किए हैं।
पार्टी ने आराधना मिश्रा मोना को आगे किया है जबकि इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। पिछड़े समुदाय से आलोक निषाद को उपाध्यक्ष बनाया गया है और दलित समुदाय से आलोक प्रसाद को वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया है। इसके अलावा यूपी के प्रभारी के रूप में राजेंद्र पाल गौतम का नाम है।
कांग्रेस की रणनीति और गणित
कांग्रेस का मानना है कि यह बदलाव पुराने ब्राह्मण‑दलित‑मुस्लिम (BDM) समीकरण को पलटने की दिशा में है। पार्टी चाहती है कि ब्राह्मणों, दलितों और मुसलमानों में से अलग‑अलग समुदाय फिर से उसके साथ वापस आएं। 1989 तक कांग्रेस को उत्तर प्रदेश और बिहार में सत्ता हासिल रही थी, लेकिन मंडल‑कमंडल के उभार के बाद उसका ताना‑बाना बिखर गया।
ब्राह्मणों का बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर चला गया और पिछड़ों की राजनीति के नाम पर सपा और आरजेडी उभरे। दलितों का बड़ा हिस्सा बसपा और लोजपा की ओर चला गया। कांग्रेस अब सोचती है कि सही चेहरों और पदोन्नति से वह पूर्व के समीकरण को दोबारा बना सकती है।
पार्टी ने खास जगहों पर नजर टिकाई है। रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और प्रयागराज के जिलों में अभी भी कांग्रेस की जड़ें हैं। आराधना मिश्रा मोना जैसे स्थानीय चेहरे इन जिलों के सामाजिक गणित को मजबूती दे सकते हैं।
पश्चिम यूपी में मजबूत होने के लिए इमरान मसूद को प्रमोशन दिया गया है। इस इलाके में यादवों की आबादी कम होने के कारण सपा का MY समीकरण उतना प्रभावी नहीं माना जाता। कांग्रेस का भरोसा है कि मुस्लिम वोटों को आकर्षित कर वह पश्चिम में अपनी दावेदारी बढ़ा सकती है।
आगे पार्टी किस तरह यह नए समीकरणों को जमीन पर बदल पाती है, यह चुनावी माहौल और स्थानीय संगठनों की कार्यशैली पर निर्भर करेगा। फिलहाल कांग्रेस ने पद वितरण और चेहरों के जरिए अपना नया राजनीतिक दिशा‑निर्देश दे दिया है।
स्रोत: NDTV

