अलीगढ़। पारिवारिक संपत्ति विवाद में अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई अभिमन्यु सिंह को नया झटका लगा है। जलालपुर स्टेट की बंटवारे से जुड़े एफआईआर मामले में हाईकोर्ट ने पांच आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और तहसीलदार न्यायालय ने रेस्टोरेशन अर्जी खारिज कर दी है।
हाईकोर्ट के आदेश और तहसीलदार का फैसला
मामले की स्थिति
हाईकोर्ट ने चोरी व संपत्ति कब्जे से जुड़े पारिवारिक विवाद की एफआईआर में नामजद सात लोगों के खिलाफ पांच की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। दूसरी तरफ हवेली से जुड़ी पुराने वसीयत की रेस्टोरेशन अर्जी तहसीलदार न्यायालय में तय समय के बाद दाखिल होने और समर्थन में पर्याप्त सबूत न होने के कारण खारिज कर दी गई।
मुकदमेबाजी के सिलसिले में चंद्रचूड़ सिंह पक्ष ने हाईकोर्ट के गिरफ्तारी रोक के फैसले को चुनौती दी है और पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। इस याचिका की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी। तहसील न्यायालय के फैसले के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में अपील भी दाखिल की गई है।
आरोपियों की सूची
- गायत्री देवी (चाची)
- जय (उनके पुत्र)
- अंजनी (उनकी बेटी)
- रॉबिन (स्वीडन के नागरिक)
- अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर
- गवाह संदीप सिंह
- शिवकुमार और एक अज्ञात व्यक्ति
चंद्रचूड़ के अनुसार, उनके दादाजी जमींदार थे और उनका निधन 1997 में हुआ था। वे कहते हैं कि उनके दादाजी के निधन से ठीक एक दिन पहले एक फर्जी वसीयत तैयार कर ली गई, जिससे सभी जमीनें कुछ लोगों के नाम ट्रांसफर कर दी गईं। 1870 में बनी ऐतिहासिक हवेली द जलालपुर स्टेट भी इसी विवाद में शामिल है।
अभियुक्त पक्ष का कहना है कि जिस वसीयत और बिल पर चंद्रचूड़ पक्ष ने सवाल उठाए थे, उसकी हैंडराइटिंग और सिग्नेचर एक्सपर्ट से जांच कराई गई जिसमें सिग्नेचर सही पाए गए। जय सिंह ने बताया कि एक्सपर्ट रिपोर्ट और वसीयत से जुड़े अन्य दस्तावेज जांच अधिकारी को सौंपे जाएंगे और परिवार पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया।
अभियुक्तों और चंद्रचूड़ पक्ष दोनों ने कानूनी रास्ता अपनाया हुआ है। आगामी सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संपत्ति के अधिकारों और वसीयत की वैधता पर आगे क्या फैसले आते हैं।
स्रोत: अमर उजाला

