अम्बेडकरनगर। 23 सितंबर से शुरू हुई बारिश का दौर रविवार सुबह कुछ देर के लिए थमा। बादल छंटने के बाद प्रशासनिक टीमें नुकसान का आकलन करने गांवों में पहुंचीं।
प्राथमिक सर्वे में जिले में कुल 29 कच्चे मकान ध्वस्त मिले हैं। अकबरपुर तहसील में 13, जलालपुर में 10, टांडा में चार और आलापुर में दो मकान गिरने की बताए गई है। प्रशासन ने प्रभावितों को तत्काल मदद देने के निर्देश दे दिए हैं।
फसलों को हुआ भारी नुक़सान
खरीफ सीजन में जिले में करीब 1.25 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी, जिसमें लगभग 15 हजार हेक्टेयर पर अगेती धान बोया गया था। इस समय अगेती धान में बालियां निकलने और दाना बनने लगा था लेकिन तेज हवा व बारिश के कारण फसल खेतों में गिर गई। कई जगह पानी भरने से धान सड़ने की आशंका जताई जा रही है।
गन्ना करीब 29,572 हेक्टेयर में उगा हुआ है और गन्ना विभाग ने करीब 10 प्रतिशत फसल प्रभावित होने की आशंका जताई है। केले की खेती लगभग 125 हेक्टेयर में होती है, जिसमें लगभग 45 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई बताई जा रही है।
राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें तथा फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि सर्वे कर रहे हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व ज्योत्सना बंधु ने बताया कि ब्लॉकवार टीमें गठित कर दी गई हैं और फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को क्षेत्र में जाकर नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों के बयान और आगे की कार्रवाई
केले के किसान विजय कुमार ने कहा, “फसल गिरने से करीब ढाई लाख रुपये का नुकसान हुआ है। बाजार में भाव भी ठीक नहीं है और फसल का बीमा नहीं कराया था।” अरुण राम वर्मा ने बताया, “ढाई बीघा केले की फसल टूटकर गिर गई, जिससे करीब साढ़े चार लाख रुपये का नुकसान हुआ है। फसल का बीमा होने के कारण विभाग से संपर्क किया जा रहा है।” चंद्रभान वर्मा ने कहा, “एक बीघा अगेती धान पूरी तरह गिर गया है। खेत में पानी भरा होने के कारण फसल की भरपाई मुश्किल नजर आ रही है।”
जिलाधिकारी ईशा प्रिया के निर्देश पर एसडीएम और राजस्व टीमें प्रभावित गांवों का दौरा कर रही हैं। चक्रवाती बारिश से ध्वस्त मकानों का सर्वे पूरा कर पीड़ितों को राहत दी जा रही है और फसलों के नुकसान की अंतिम रिपोर्ट जल्द तैयार कर किसानों को नियमानुसार मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

