बड़ौत। नवरात्र के मद्देनज़र हिलवाड़ी गांव की मुस्लिम महिलाएं मां दुर्गा की चुनरी सजाने का काम कर रही हैं। इस काम में गांव की कई महिलाएं, युवतियाँ और बच्चे सुबह से शाम तक जुटे रहते हैं।
गांव में कुल 250 मुस्लिम परिवार हैं। इनमें से करीब 100 परिवार नवरात्र से पहले चुनरी तैयार करने के काम में लग जाते हैं। परिवार के एक सदस्य दिनभर में 25 से 30 चुनरियां तैयार कर लेता है।
काम और कमाई
एक चुनरी पर गोटा और सितारे लगाने के 8 से 10 रुपये मिलते हैं। रुखसाना और रूबी ने कहा कि चुनरी बनाने में करीब एक घंटे का समय लगता है, इसलिए यह आमदनी घर के खर्च में मदद करती है। बाजार में बनी चुनरियों की कीमत करीब 100 से 150 रुपये तक रहती है।
निमा और उनका परिवार करीब डेढ़ दशक से मां की चुनरी तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस काम से परिवार का गुजारा चल रहा है और इससे आपसी सौहार्द का संदेश भी मिलता है। खुर्शीदा और सानिया ने कहा, “मां तो मां होती है, धर्म से क्या लेना।”
गांव में काम सुबह से शाम होता है और चुनरियों पर गोटा‑सितारे लगाने का काम सब मिलकर करते हैं। तैयार चुनरियों को पैक करने और भेजने की जिम्मेदारी किसी न किसी घर के पास रहती है, जो उन्हें बाजार तक पहुंचाता है।
यह चुनरियां बागपत के साथ मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और गाजियाबाद के बाजारों में भेजी जाती हैं। इनके अलावा इन्हें दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड के मंदिरों तक भी पहुँचाया जाता है।
स्थानीय महिलाएँ कहती हैं कि यह काम रोजगार का साधन होने के साथ समुदायों के बीच भाईचारे की मिसाल भी बन गया है। नवरात्र से पहले मांग बढ़ने पर काम और आय दोनों बढ़ते हैं।
गांव के लोगों ने बताया कि मांग के हिसाब से चुनरियों की आपूर्ति की जाती है और भंडार व पहुंच की जिम्मेदारी पारिवारिक व्यवस्था से संभाली जाती है।
स्रोत: अमर उजाला

