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गाज़ियाबाद: वैवाहिक विवाद में दर्ज मामले की चुनौती खारिज, निचली अदालत का आदेश बरकरार

अपर सत्र न्यायाधीश ने चार अक्तूबर 2024 के समन आदेश में कोई कानूनी त्रुटि न पाई; याचिका में आरोप था कि मामला दबाव बनाने के लिए रचा गया।

गाज़ियाबाद: वैवाहिक विवाद में दर्ज मामले की चुनौती खारिज, निचली अदालत का आदेश बरकरार
फोटो: अमर उजाला

गाज़ियाबाद। वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में दर्ज समन आदेश को चुनौती देने वाली निगरानी याचिका पर शुक्रवार को फैसला सुनाया गया। अपर सत्र न्यायाधीश मनीष निगम की अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी और निचली अदालत का आदेश बरकरार रखा।

अदालत ने निचली अदालत द्वारा चार अक्तूबर 2024 को दिया गया समन आदेश सही माना और कहा कि आदेश में किसी तरह की कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई। यह याचिका मेरठ निवासी गुरनिंदर कौर, परमजीत सिंह कलसी, हरजीत कौर, अमरजीत सिंह कलसी और भोली उर्फ कुलविंदर कौर की ओर से दाखिल की गई थी।

याचिका में लगाए गए मुख्य आरोप

याचिका में आरोप था कि रमजीत सिंह जंडू ने वैवाहिक विवाद के चलते गुरनिंदर कौर और उनके परिजनों को झूठे मामले में फंसाया है। याचिकाकर्ताओं ने निचली अदालत के समन आदेश को निरस्त करने की मांग की थी। मामले में कहा गया कि शिकायत दबाव बनाने और बचने की नीयत से की गई।

मामले के विवरण के अनुसार, रमजीत सिंह और गुरनिंदर कौर का विवाह नवंबर 2020 में हुआ था। दोनों तरफ से वैवाहिक विवाद के दौरान मारपीट, उत्पीड़न व धमकी के आरोप लगे। रमजीत सिंह का आरोप था कि फरवरी 2022 में उनके पिता के साथ मायके जाने पर गुरनिंदर कौर के परिजनों ने अभद्रता और मारपीट की।

गुरनिंदर कौर ने इन आरोपों का खंडन किया और ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग व उत्पीड़न का आरोप लगाया। सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों के बीच विवाद आपसी बातचीत और समझौते से समाप्त हो गया है और दोनों ने आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध खत्म करने के लिए मेरठ परिवार न्यायालय में तलाक की कार्यवाही भी शुरू कर रखी है।

अपर सत्र न्यायाधीश ने पत्रावली और प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि निचली अदालत ने परिवादी के बयान व साक्ष्यों पर विचार कर आरोपी पक्ष को तलब किया था। इसलिए निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई और निगरानी याचिका खारिज कर दी गई।

अब निचली अदालत के समन आदेश के मुताबिक आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। जिन पक्षों ने याचिका दाखिल की थी वे आगे का जो भी कानूनी रास्ता अपनाना चाहें, वह अदालत के आदेशों के अनुसार कर सकेंगे।

स्रोत: अमर उजाला

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Vikas Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।