गोंडा। वर्ष 2007 के आगजनी और धमकी के मामले में सत्र न्यायाधीश दुरग नरायण सिंह ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपील स्वीकार कर ली और इटियाथोक निवासी लाल बहादुर पांडेय व विषदेव पांडेय को दोषमुक्त कर दिया। यह अपील प्रदीप पांडेय ने दायर की थी, जिन्होंने अदालत में कहा था कि आरोपियों ने उनके घर में आग लगाई और जान से मारने की धमकी दी थी।
निचली अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई थी। आरोपियों द्वारा सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई थी। अपील सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि घटना से जुड़े साक्ष्यों में विरोधाभास हैं और साक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
अपील पर अदालत का आदेश
सत्र न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों की समीक्षा की। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं किया। इसी आधार पर निचली अदालत का निर्णय निरस्त कर दोनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।
अदालत के इस उल्लेख के बाद लाल बहादुर पांडेय और विषदेव पांडेय को किसी दंड से मुक्त कर दिया गया। मामले का अभियोग और निचली अदालत की सजा अब खारिज कर दी गई है।
अन्य संबंधित कार्यवाही
गोंडा के विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट आलोक शर्मा की अदालत ने एक अलग मामले में परिवादी के लगातार अनुपस्थित रहने और साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर परिवाद खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान एक अक्टूबर को परिवादी हरिशंकर उपस्थित नहीं थे और उनकी ओर से स्थगन प्रार्थना पत्र भी नहीं दिया गया। आदेश के अनुसार वे पूर्व निर्धारित कई तारीखों पर अदालत में मौजूद नहीं थे।
उसी जिले में मोबाइल टावर से बैटरी चोरी के एक मामले में भी सुनवाई हुई। इटियाथोक क्षेत्र में टावर से चोरी में अभियोजन ने बताया कि 600 एएच की 22 सेल और 300 एएच की 20 सेल गायब हुई थीं। इस मामले में आरोपी इरफान की अग्रिम जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट फूलचंद्र कुशवाहा ने खारिज कर दी। विवेचना के दौरान सहआरोपियों के बयानों के आधार पर आरोपी का नाम सामने आया।
जिला न्यायालय की इन हालिया कार्रवाइयों का स्थानीय लोगों में सेंट्रल सिस्टम और साक्ष्य गतिविधियों पर असर दिखना शुरू हो गया है। आगे की सुनवाई और किसी अपील संबंधी कदम की जानकारी मिलने पर अदालत की अगली तारीखों पर निर्भर रहेगी।
स्रोत: अमर उजाला

