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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को स्पेशल टीईटी‑2026 से बाहर रखा

हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति नियमित शिक्षकों से अलग है और वे केवल सामान्य टीईटी के आधार पर स्पेशल टीईटी का दावा नहीं कर सकते।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को स्पेशल टीईटी‑2026 से बाहर रखा
फोटो: अमर उजाला

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है जिनमें शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी 2026) में बैठने की अनुमति मांगी जा रही थी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह परीक्षा केवल उन्हीं मौजूदा शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही है जिनकी सेवाएँ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत टीईटी पास होने पर निर्भर हैं।

हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया और याचिकाकर्ताओं का तर्क खारिज कर दिया कि वे केवल इस आधार पर स्पेशल टीईटी में शामिल होने के अधिकारी हैं कि वे सामान्य टीईटी के लिए पात्र हैं। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति नियमित रूप से सेवामें रहने वाले शिक्षकों से अलग है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और राज्य की योजना

सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के अनुसार, सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत सभी शिक्षकों को टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि जिन शिक्षकों के पास यह योग्यता नहीं है, उन्हें अगले एक साल के भीतर स्पेशल टीईटी पास कर लेना चाहिए, नहीं तो उनकी नौकरी पर असर पड़ सकता है।

इसी निर्देश के पालन में उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग’ के माध्यम से स्पेशल टीईटी 2026 आयोजित करने का निर्णय लिया था। पण्‍च आपत्तियों को देखते हुए न्यायालय ने साफ कर दिया कि स्पेशल परीक्षा का दायरा केवल उन्हीं शिक्षकों तक सीमित रहेगा जिनकी सेवाएँ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार टीईटी के पास होने पर निर्भर हैं।

इस आदेश का सीधा असर लाखों शिक्षामित्रों पर होगा जो फिलहाल नियमित शिक्षकों की तरह सेवाएँ दे रहे हैं पर उनकी कानूनी स्थिति अलग दर्ज है। स्थानिक शिक्षामित्रों ने पिछले दिनों स्पेशल टीईटी में शामिल होने की आशा जताई थी, पर अब उनकी याचिकाएं अदालत ने खारिज कर दीं।

स्थानीय शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि आयोग और सरकार अब जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर अर्हता एवं परीक्षा प्रक्रिया पर आगे की कार्यवाही करेंगे। प्रभावित शिक्षामित्र अपने दस्तावेज और कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

स्रोत: अमर उजाला

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Vikas Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।