लखनऊ। आजकल कई ओटीटी प्लेटफॉर्म, म्यूजिक एप और अन्य ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर उपयोगकर्ताओं को नया खींचने के लिए 7 से 30 दिनों का ‘फ्री ट्रायल’ देते हैं। बहुत से यूजर बिना ध्यान दिए कार्ड या यूपीआई की डिटेल्स दर्ज कर देते हैं और ऑटो-रिन्यूअल चालू रख देते हैं।
ऐसे में जब फ्री ट्रायल की अवधि खत्म होती है तो प्लेटफॉर्म की मंजूरी के कारण सब्सक्रिप्शन की रकम बैंक से कट जाती है। यही वजह है कि कई लोगों को अचानक अपने खाते से पैसे कटने का अहसास होता है।
फ्री ट्रायल और ऑटो-डेबिट का खेल
फ्री ट्रायल आम तौर पर 7 से 30 दिनों के बीच होता है। ट्रायल के दौरान उपयोगकर्ता से भुगतान की जानकारी मांगी जाती है ताकि ट्रायल खत्म होने पर सर्विस अपने आप रिन्यू हो सके। अगर ऑटो-रिन्यूअल ऑन रहता है तो सिस्टम स्वचालित रूप से पहली पेमेंट डेबिट कर देता है।
चंद बातों का ध्यान रखकर आप अनचाहे कटौती से बच सकते हैं।
- सब्सक्रिप्शन लेते समय ऑटो-रिन्यूअल चेक करें और आवश्यकता न हो तो बंद कर दें।
- फ्री ट्रायल की अवधि नोट कर लें और उससे पहले रद्द कर दें अगर आगे सेवा नहीं चाहिए।
- बैंक/UPI स्टेटमेंट समय-समय पर जाँचते रहें ताकि अनचाहे लेनदेन तुरंत पकड़ा जा सके।
स्थानीय उपयोगकर्ता कहते हैं कि फ्री सर्विस मिलने पर वे जल्दबाजी में जानकारी दर्ज कर देते हैं। कई बार भूल से ऑटो-रिन्यूअल ऑन रह जाता है और पैसे कटने के बाद शिकायत करनी पड़ती है।
अगर ट्रायल खत्म होने पर पैसे कट गए हैं तो सबसे पहले उस एप की सेटिंग में जाकर सब्सक्रिप्शन रद्द करें और अपने बैंक से तुरंत संपर्क करें। साथ ही एप के कस्टमर केयर से रिफंड की संभावना और प्रक्रिया के बारे में पूछताछ करें। भविष्य में इस तरह के ऑफर लेते समय शर्तें और पेमेंट सेटिंग्स ध्यान से पढ़ना सबसे जरूरी कदम है।
स्रोत: अमर उजाला

