प्रतापगढ़। जिला साइबर सेल ने अब साइबर ठगी में फँसे लोगों के लिए राहत की खबर दी है। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) पोर्टल के जरिए ठगी की रकम सीधे पीड़ितों के बैंक खाते में भेजी जा रही है।
साइबर थाने के आंकड़ों के अनुसार, एमआरएम पोर्टल की मदद से कुल 9.46 लाख रुपये पीड़ितों के खातों में लौटाए गए हैं। सितंबर में साइबर थाने में 104 शिकायतें दर्ज हुईं। विशेष रूप से 1 अक्तूबर को 10 शिकायतों पर 49,891 रुपये लौटाए गए और 2 अक्तूबर को छह शिकायतों पर कुल 23,529 रुपये खातों में भेजे गए। इसके अलावा 10 शिकायतकर्ताओं के लिए 32,187 रुपये भी साइबर सेल के माध्यम से भेजे गए।
एमआरएम कैसे काम करता है
पहले ठगी की रकम वापस पाने के लिए लंबी अदालती प्रक्रिया की जरूरत पड़ती थी। अब शिकायत मिलते ही बैंक खाते में ठगी की रकम को होल्ड कर दिया जाता है और एमआरएम पोर्टल के जरिये रकम वापसी की कार्रवाइयां शुरू कर दी जाती हैं। इससे पीड़ितों को कोर्ट-घूमने की आवश्यकता नहीं रहती।
साइबर नोडल अधिकारी व एएसपी पूर्वी आलोक कुमार ने बताया कि साइबर ठगी के पीड़ितों की धनराशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी गई है। जिले में इस नई प्रक्रिया से पीड़ितों को त्वरित राहत मिली है और शिकायत निस्तारण की गति बढ़ी है।
लोकल प्रभाव और सलाह
स्थानीय लोग एमआरएम से हुए भुगतान से राहत महसूस कर रहे हैं क्योंकि रोजमर्रा की जिंदगी में ऑनलाइन भुगतान सामान्य हो गया है। साइबर सेल ने ठगियों से बचने के लिए कुछ सावधानियों का भी सुझाव दिया है।
सावधानियों में पासवर्ड मजबूत रखना, अलग‑अलग रखना, टू‑फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखना और फोन व एप्लिकेशन अपडेट रखना शामिल हैं। साइबर ठगी होने पर छह घंटे में सीईआरटी डैश इन पर रिपोर्ट करने या 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।
शिकायत मिलते ही बैंक खाते को होल्ड किया जाता है और एमआरएम से रकम वापसी की प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है। पीड़ितों को बताया गया है कि तुरंत कार्रवाई के लिए समय पर रिपोर्ट करें और साइबर सेल से संपर्क करें।
स्रोत: अमर उजाला

