ब्रेकिंग

संभल सिरसी: इमाम बारगाह में मजलिस, कर्बला से सच्चाई पर कायम रहने की सीख

मजलिस में मर्सिया मोहम्मद असगर ने नाज पढ़ा और मौलाना मीसम अब्बास मुजफ्फरनगरी ने हक व बातिल पर विस्तृत रूप से रोशनी डाली।

संभल सिरसी: इमाम बारगाह में मजलिस, कर्बला से सच्चाई पर कायम रहने की सीख
फोटो: अमर उजाला

सिरसी। मोहल्ला शर्की सादात स्थित इमाम बारगाह में मजलिस का आयोजन किया गया। आयोजन में आसपास के लोगों की उपस्थिति रही और शोकमय माहौल देखा गया।

मजलिस के दौरान मर्सिया मोहम्मद असगर और उनके साथियों ने मर्सिया पढ़ा। लोगों ने नम आँखों से सुनते हुए इमाम हुसैन की शहादत को याद किया।

कर्बला का पैगाम

मजलिस में मौलाना मीसम अब्बास मुजफ्फरनगरी ने हक और बातिल पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने हक पर रहते हुए अपनी कुर्बानी दी और सच व इंसाफ के उसूलों पर चलता हुआ संदेश दिया।

मौलाना ने बताया कि कुरान इंसान को हमेशा हक का साथ देने और बातिल से दूर रहने की शिक्षा देता है। उनका कहना था कि कर्बला केवल इतिहास का सबक नहीं है, बल्कि सच्चाई और इंसाफ पर कायम रहने की सीख है।

मौलाना ने यह भी कहा कि इमाम हुसैन ने मुश्किल हालात में भी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि किसी भी हालत में जुल्म और झूठ का साथ न दें और अपने ईमान व किरदार की रक्षा करें।

मजलिस के आखिरी हिस्से में हजरत इमाम हुसैन अलैह के मसाइब बयान किए गए। मसाइब सुनकर कई अजादारों की आँखें नम हो गईं और शोक की लहर देखी गई।

आयोजन के बाद मौजूद लोगों ने कहा कि ऐसी धार्मिक सभाओं से न केवल श्रद्धा बढ़ती है, बल्कि समुदाय में एकता और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा भी मिलती है। आगे ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित करने की चर्चा भी हुई।

स्रोत: अमर उजाला

अगली खबरसंभल चंदौसी: बैंक कर्मचारियों ने रविवार खुले जाने के फैसले का विरोध, काली पोशाक में प्रदर्शनसंभल चंदौसी: बैंक कर्मचारियों ने रविवार खुले जाने के फैसले का विरोध, काली पोशाक में प्रदर्शन
Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।